होम लोन क्या है
घर ख़रीदने या बनाने के लिए लंबी अवधि का लोन, जिसमें संपत्ति बैंक के पास गिरवी (मॉर्टगेज) रहती है। लोन चुकने तक मूल दस्तावेज़ अक्सर बैंक के पास रहते हैं।
मुख्य बातें
- LTV सीमा (RBI) — ₹30 लाख तक के लोन पर संपत्ति मूल्य का अधिकतम 90 %, ₹30–75 लाख पर 80 % और उससे ऊपर 75 %। बाक़ी डाउन पेमेंट आपको देना होगा।
- अतिरिक्त ख़र्च — स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन (राज्य के अनुसार; कई राज्यों में महिलाओं के लिए छूट), प्रोसेसिंग फ़ीस, क़ानूनी और तकनीकी जाँच।
- अवधि — आमतौर पर 30 साल तक, उम्र के आधार पर।
- Key Fact Statement (KFS) — बैंक को APR सहित सभी शुल्कों वाला KFS देना ज़रूरी है।
ब्याज दर
ज़्यादातर होम लोन फ़्लोटिंग रेट पर होते हैं, जो बाहरी बेंचमार्क (जैसे RBI रेपो रेट — EBLR/RLLR) से जुड़े होते हैं। रेपो रेट बदलने पर EMI या अवधि बदलती है। फ़िक्स्ड रेट कम मिलते हैं और महँगे होते हैं।
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टैक्स लाभ और सब्सिडी
- धारा 24(b) — स्व-अधिकृत घर के लोन ब्याज पर सालाना ₹2 लाख तक की कटौती (पुरानी टैक्स व्यवस्था में)।
- धारा 80C — मूलधन पुनर्भुगतान पर ₹1.5 लाख तक (पुरानी व्यवस्था में)। नई टैक्स व्यवस्था में ये लाभ स्व-अधिकृत घर पर नहीं मिलते।
- PMAY-U 2.0 — पात्र EWS, LIG और MIG परिवारों को ब्याज सब्सिडी (₹1.8 लाख तक का लाभ)।
बैंकों में अंतर
| शर्त | संभावित अंतर |
|---|---|
| ब्याज दर | बेंचमार्क पर स्प्रेड, क्रेडिट स्कोर के आधार पर। |
| प्रोसेसिंग फ़ीस | 0 % से 1 % तक या ऑफ़र। |
| बीमा | होम लोन प्रोटेक्शन प्लान की पेशकश। |
| बैलेंस ट्रांसफ़र | दूसरे बैंक से कम दर पर ट्रांसफ़र की सुविधा। |
साइन करने से पहले
- कई बैंकों के KFS में APR और कुल राशि की तुलना करें।
- EMI आय के 40–50 % से ज़्यादा न रखें।
- CIBIL स्कोर जाँचें और आपात निधि रखें।
यह सामग्री सामान्य जानकारी के लिए है, प्रकाशन की तारीख़ पर भारत में लागू नियमों का वर्णन करती है और वित्तीय, कानूनी या कर सलाह नहीं है। नियम और बैंकों की शर्तें बदलती रहती हैं — हमेशा अपना लोन एग्रीमेंट, Key Fact Statement और RBI जैसे आधिकारिक स्रोत देखें।