प्रीपेमेंट क्या है
लोन का कुछ हिस्सा (पार्ट-प्रीपेमेंट) या पूरा लोन (फ़ोरक्लोज़र) समय से पहले चुकाना। ब्याज बकाया मूलधन पर लगता है, इसलिए हर प्रीपेमेंट आगे का ब्याज घटाता है।
RBI के नियम
- फ़्लोटिंग रेट लोन — व्यक्तियों को ग़ैर-व्यावसायिक उद्देश्य के लिए दिए गए लोन पर कोई प्रीपेमेंट या फ़ोरक्लोज़र शुल्क नहीं।
- फ़िक्स्ड रेट लोन — शुल्क लोन एग्रीमेंट और KFS के अनुसार हो सकता है; साइन करने से पहले जाँचें।
- बैंक को शुल्क पहले से KFS में बताने होते हैं; बाद में नए शुल्क नहीं जोड़े जा सकते।
EMI घटाएँ या अवधि?
अवधि घटाने से ज़्यादा ब्याज बचता है; EMI घटाने से मासिक बोझ कम होता है।
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कब फ़ायदेमंद है
लोन की शुरुआत में। अगर आप पुरानी टैक्स व्यवस्था में धारा 24(b) का पूरा लाभ ले रहे हैं, तो उसका असर भी देखें। महँगे कर्ज़ (क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन) पहले चुकाएँ और आपात निधि रखें।
अंतर
| शर्त | संभावित अंतर |
|---|---|
| फ़िक्स्ड रेट शुल्क | 0 % से कुछ प्रतिशत तक। |
| न्यूनतम राशि | पार्ट-प्रीपेमेंट की न्यूनतम सीमा। |
| चैनल | नेट बैंकिंग या शाखा। |
कैसे करें
- बैंक से फ़ोरक्लोज़र स्टेटमेंट लें।
- EMI या अवधि घटाने का विकल्प चुनें।
- लोन बंद होने पर NOC लें और मूल संपत्ति दस्तावेज़ वापस लें; RBI नियमों के अनुसार बैंक को तय समय में दस्तावेज़ लौटाने होते हैं।
यह सामग्री सामान्य जानकारी के लिए है, प्रकाशन की तारीख़ पर भारत में लागू नियमों का वर्णन करती है और वित्तीय, कानूनी या कर सलाह नहीं है। नियम और बैंकों की शर्तें बदलती रहती हैं — हमेशा अपना लोन एग्रीमेंट, Key Fact Statement और RBI जैसे आधिकारिक स्रोत देखें।